Ram lakhan की फिल्म. Professor Ram Lakhan Meena AADIVASIMAN.wealthcycles.com: इंटरनेट की दुनिया में हिंदी का भविष्य 2018-10-10

Ram lakhan की फिल्म Rating: 6,5/10 131 reviews

Rohit Shetty Offered Ram Lakhan To Ranveer Singh Before Simmba Karan Johar Releasing Sara Ali Khan Interview

ram lakhan की फिल्म

हषर्वर्धन कपूर ने अब तक दो फिल्मों में काम किया लेकिन उनकी फिल्में सफल नहीं रही है. ५ मेगाबाइट खर्च होंगे। पुस्तकों के पाठकों की संख्या में आई गिरावट के इस दौर में इंटरनेट हमें एक नया पाठक वर्ग पैदा करने का अवसर देता है। तकनीकी विकास के साथ किताब का स्वरूप भी बदला है। हम जिस रूप में किताब को आज पाते हैं वह पहले से ऐसी नहीं थी। लेकिन तब तक से लेकर अब तक उसके होने पर कोई विवाद नहीं रहा। हाँ। तकनीक का विरोध औद्योगिक क्रांति के समय से ही कमोबेश होता रहा है। विक्टोरियन इंग्लैंड में कवि और समाज सुधारक विलियम मौरिस एक समय प्रिंटिंग प्रेस के सख़्त विरोधी थे। उनकी नज़र में इससे किताब के सौंदर्य और भव्यता पर आँच पहुँचती थी। स्पष्टत: यह एक अभिजातवादी दृष्टिकोण है। हिंदी के रचनाकारों की समस्या है कि वह तकनीक का कोई सकारात्मक उपयोग प्राय: अपने लिए नहीं पाते। क्या यह स्थिति इसलिए है कि वें एक पिछड़े समाज के प्रतिनिधि हैं? ये दो ऐक्टर 12 साल बाद एक बार फिर से एक साथ स्क्रीन पर नजर आएंगे, इस काम को अंजाम दिया है प्रोड्यूसर एकता कपूर और डायरेक्टर संजय गुप्ता ने. ऐड्रस और इंटरनेट संबंधी अन्य तकनीकी चीजें हिंदी में नहीं होंगी, तब तक अंग्रेजी न जानने वाले बहुसंख्यक हिंदीभाषी इससे नहीं जुड़ेंगे। इस प्रकार के इंटरनेट उपयोगकर्ता भविष्य में सर्वाधिक लाभ देने वाले सिद्ध हो सकते हैं। तीसरी बड़ी समस्या इंटरनेट पर कोई ' इच्छित जानकारी खोजने' से संबंधित है। इंटरनेट का एक बड़ा ही दिलचस्प आयाम ' सर्च इंजन' हैं। सर्च इंजन की सहायता से इंटरनेट उपयोगकर्ता बड़ी आसानी से कैसी भी वांछित जानकारी जुटा लेता है। विडंबना बस यही है कि सूचना क्रांति के दूसरे दौर में प्रवेश हो जाने के बावजूद हिंदी में एक भी सर्च इंजन नहीं हैं। इंटरनेट पर लगभग सभी जानकारियाँ चूँकि अंग्रेज़ी में हैं, इसलिए सर्च इंजन भी अंग्रेज़ी में ही हैं। अंग्रेज़ी भाषा न जानने वाले के लिए इसकी कोई उपयोगिता नहीं हैं। कहना न होगा कि हिंदी पट्टी को सूचना क्रांति के पूरे लाभ नहीं मिले हैं। इस मायने में पहले से पिछड़ी हिंदी पट्टी और पीछे जा रही है। जबतक हिंदी का अपना विशाल डेटाबेस नहीं बन जाता, तब तक सर्च इंजन में अनुवाद की सुविधा देने वाले सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जा सकता है। भाषा भले ही सहज, प्रवाहपूर्ण न हो, लेकिन अंग्रेज़ी न जानने वाला कम से कम अपनी भाषा में जानकारी तो जुटा सकेगा, इस दिशा में कापीराइट की समस्या आड़े आ सकती है, तो एक सुझाव यह हो सकता है कि इस तरह की साइट के लिए कुछ पैसा लिए जाने का प्रावधान कर लिया जाए, हालाँकि यह कोई बहुत कारगर उपाय प्रतीत नहीं होता है, क्यों कि इंटरनेट पर पैसा उपयोगकर्ताओं से न लेकर विज्ञापनदाताओं से लिया जाता है। बिल्कुल टी. So essentially the heart itself is missing. चर्चा है कि अनिल कपूर ने सुभाष घई से इस बारे में चर्चा की है और अगले महीने तक ये प्रोजेक्ट फाइनल हो सकता है. क्यों नकारात्मक विचारों ने घेर रखा है? क्या ये प्राकृतिक रूप से हमारे साथ जुड़े हैं? अनिल कपूर का मानना है कि उनके बेटे में दम है और खराब फिल्मों की वजह से हषर्वर्धन का नुकसान हुआ. उनकी फिल्म के लिए कोई भी एक्टर एक साथ काम करने के लिए तैयार नहीं हो रहा है.

Next

Rohit Shetty Offered Ram Lakhan To Ranveer Singh Before Simmba Karan Johar Releasing Sara Ali Khan Interview

ram lakhan की फिल्म

खबरें आई कि फिल्म में रणवीर सिंह लखन का किरदार निभाएंगे. क्या वे जिंदगी में जो बनना चाहते थे वो बन पाएँ? But of late, festivals depress me, more than anything else. अनिल कपूर उन्हें एक बड़ा ब्रेक देना चाहते हैं. Millions of Units of Blood donated already and close to 45 million Trees planted by these thick-skinned followers. रोहित शेट्टी ने ऐलान किया कि वो नए दौर के एक्टर्स के साथ फिर से इस फिल्म को बनायेंगे.

Next

नहीं बनेगा फिल्म राम लखन का रीमेक: रोहित शेट्टी

ram lakhan की फिल्म

ट्रेलर में ऐश्वर्या सिंगिंग सेंसेशन बनी हैं तो अनिल एक मजबूर पिता के रोल में हैं. Even in Mumbai, just to clean the streets, 5 lacs volunteers were there with brooms and strong will. They have always kept us waiting for the weeks and months in advance for the festive energy that comes along. कुछ महीनो पहले खबर आई थी कि फिल्ममेकर रोहित शेट्टी इस धमाकेदार फिल्म की रीमेक बनाना चाहते हैं. Even with their blood, they make sure no one dies, in need of a pint of blood.

Next

Director Rohit Shetty to make Ram Lakhan remake with Ranveer Singh

ram lakhan की फिल्म

अनुशासन और नियम का डंडा दिखलाकर बच्चों को डराने वाले शिक्षक अपनी जिंदगी में कितने अनुशासित हैं? संजय गुप्ता जैकी के साथ राम शस्त्र औऱ जंग में भी काम कर चुके हैं. क्या हमें यह खयाल आता है कि जो बच्चा हमें खाना परोस रहा है उसका पेट भरा हुआ है या नहीं? को छोड़कर सभी कंप्यूटरों में ए. संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान न केवल मानवता का पाठ पढ़ाते हैं बल्कि इस पर चलना भी सिखाते हैं। उन्होंने 133 मानवता भलाई के काम शुरू किए हैं जो कि उनके अनुयायी और शाह सतनाम जी ग्रीन ऐस वेलफेयर फ़ोर्स विंग के सदस्य दिलो-जान से मानते हैं। ये फ़ोर्स अपने आप में पहली ऐसी सामाजिक - आध्यात्मिक संस्था है जिसमे लगभग 80 हजार स्वयंसेवी शामिल हैं। ये सभी सदस्य देश विदेश में हर प्रकार के मानवता भलाई के कामों के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। गुरु जी ने ऐसे ऐसे मानवता भलाई के काम शुरू किए जिनके बारे में किसी नेता ने तो कभी सोचा तक नहीं होगा। उनमें से कुछ एक का वर्णन यहाँ किया गया है : 2. इस फिल्म के बारे में कहा जा रहा है कि ये एक जबरदस्त मसाला एंटरटेनर फिल्म है, जिसमें दर्शकों को एक्शन के साथ-साथ दमदार डायलॉग्स भी सुनने को मिलेंगे. To do fewer things, but do it with your complete self into it. One can see how they provide clothes, to the needy, in neatly packed packets, the monthly stock of groceries, blankets to combat winters, shoes, bags, medicines. After all, millions following a single voice are no less than the miracle.

Next

Baba Ram Rahim की ताज़ा खबरे

ram lakhan की फिल्म

We are all too social, but again hearts are not visible. Indeed, has some black magic as people doubt, else how can one convince millions towards such crazy endeavours. ऐसे में अनिल कपूर को रोकना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है. बॉलीवुड डायरेक्ट सुभाष घई की सुपरहिट फिल्म राम लखन में काम करने के बाद को आज भी उनके रील नाम लखन के नाम से जाना जाता हैं। अनिल कपूर, जैकी श्राफ की जोड़ी वाली इस फिल्म को रीमेक करने की कोशिश कुछ सालों पहले हुई थी, जब करण जौहर-रोहित शेट्टी ने इसका रीमेक करने की घोषणा की थी, लेकिन किसी वजह से ये प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका था। अब एक बार फिर खबर है कि अनिल कपूर राम लखन का रीमेक करना चाहते हैं और ये रीमेक लखन के नजरिए से होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फिल्म के रीमेक से अनिल अपने बेटे को एक और बड़ा मौका देना चाहते हैं। हर्षवर्धन कपूर की अब तक दो फिल्में आईं हैं और दोनों ही फ्लॉप रही है इसी को देखते हुए अनिल कपूर उन्हें एक बड़ा ब्रेक देना चाहते हैं।. जितनी दिलचस्प अनिल कपूर की फिल्म की कहानी है, उतने ही दिलचस्प अंदाज में अनिल कपूर फिल्म का ट्रेलर लॉन्च करते भी नजर आए. I kind of wait for the festivals to get over soon. Marrying prostitutes and the young volunteers had their hands in the air in unison, all ready to be in Grooms attire.

Next

बेटे हर्षवर्धन के साथ अनिल कपूर बनाना चाहते हैं इस हिट फिल्म का रीमेक

ram lakhan की फिल्म

जहां ज़मींदारों के अन्याय के खिलाफ शूद्र समाज के कुछ लोग हथियार उठाते हैं और ज़मींदारों के गुस्से की आग में झुलसता है पूरा शूद्र समाज. वैसे कुल मिलाकर एक अच्छी नीयत से बनाई गई है यह फिल्म, जो समाज को एक संदेश देती है और साबित करती है कि कम बजट और कम सुविधाओं के साथ भी बड़ा संदेश दिया जा सकता है. वे कितने नियमों का पालन करते हैं? वैसे भी 'फन्ने खां' के ट्रेलर में उनकी बेहतरीन एक्टिंग नजर आती है. Everything is undertaken just to impress. कहा जाता है कि सकारात्मकता एक इंसान के जीवन में अद्भुत रूप से कार्य कर सकती है सकारात्मकता के बारे में महान अद्भुत क्या हो सकता है? I have seen them travelling thousands of kilometres for their brothers and sisters in Bhuj, Orissa, Nepal. Also, celebrations are all about helping others, which we have forgotten. सुभाष घई के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म बॉलीवुड की बेस्ट फिल्मों की लिस्ट में शुमार होती है.


Next

Varun Dhawan, Sidharth Malhotra Are The New Age Ram Lakhan

ram lakhan की फिल्म

करण जौहर की फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' से साथ-साथ अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले वरुण और सिद्धार्थ एक बार फिर से बड़े पर्दे पर साथ नजर आएंगे। बॉलीवुड लाइफ डॉट कॉम में छपी खबर के अनुसार दोनों को 'राम लखन' की रीमेक के लिए साइन कर लिया गया है। हालांकि इस बारे में सार्वजनिक रूप से कोई ऐलान अभी नहीं किया गया है। माना जा रहा है इसकी औपचारिक घोषणा जल्द ही हो जाएगी। पिछले साल अगस्त में करण जौहर के प्रोडक्शन हाउस ने रोहित शेट्टी और करण जौहर मुक्ता आर्ट्स के सहयोग से 'राम लखन' बनाने की घोषणा की थी। इस फिल्म में राम और लखन के रोल के लिए वरुण-सिद्धार्थ और अर्जुन कपूर-रणवीर सिंह के नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी। आखिरकार फिल्म वरुण और सिद्धार्थ की झोली में आ गई। खबर के मुताबिक इस रीमेक में सिद्धार्थ बड़े भाई के रोल में होंगे जबकि वरुण छोटे भाई का किरदार निभाएंगे। 1989 में आई फिल्म 'राम लखन' में जैकी श्रॉफ ने बड़े भाई का जबकि अनिल कपूर ने छोटे भाई का रोल किया था। इस रीमेक में सिद्धार्थ राम बनकर जैकी का किरदार निभाएंगे जबकि वरुण लखन बनेंगे जिसे अनिल कपूर ने निभाया था। देखना है कि फिल्म में वरुण और सिद्धार्थ के साथ किन अभिनेत्रियों को साइन किया जाएगा। 1989 में आई 'राम-लखन' में माधुरी दीक्षित और डिंपल कपाडिया ने काम किया था। जबकि राम और लखन की मां का रोल राखी ने निभाया था। फिल्म के 2016 में रिलीज होने की उम्मीद है। विज्ञापन हालांकि इस बारे में सार्वजनिक रूप से कोई ऐलान अभी नहीं किया गया है। माना जा रहा है इसकी औपचारिक घोषणा जल्द ही हो जाएगी। पिछले साल अगस्त में करण जौहर के प्रोडक्शन हाउस ने रोहित शेट्टी और करण जौहर मुक्ता आर्ट्स के सहयोग से 'राम लखन' बनाने की घोषणा की थी। इस फिल्म में राम और लखन के रोल के लिए वरुण-सिद्धार्थ और अर्जुन कपूर-रणवीर सिंह के नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी। आखिरकार फिल्म वरुण और सिद्धार्थ की झोली में आ गई। अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी , और के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।. इस प्रमोशन के चलते रोहित और रणवीर मीडिया से मुखातिब हो रहे हैं लेकिन इसी दरम्यान रोज नए-नए खुलासे भी हो रहे हैं. कहलाता है के ज़रिए इंटरनेट उपयोगकर्ता दुनिया भर की कैसी भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार जो कार्य प्रिटिंग मशीन के आविष्कार से आरंभ हुआ था, उसे इंटरनेट ने विस्तार ही दिया है, अतिशय सूचना की समस्या और इस पर किसी एक ही व्यक्ति विशेष के वर्चस्व के प्रश्न को निश्चित ही अनदेखा नहीं किया जा सकता, इस ओर सावधान रहने की आवश्यकता है। जहाँ तक इंटरनेट पर साहित्यिक कृतियाँ उपलब्ध कराने की बात है, तो यह प्रकाशकों और साहित्यकारों की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। प्रारंभिक दौर में हम पीछे रह गए हैं। इंटरनेट की उपयोगिता को सबसे पहले विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं ने ही समझा टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण, नई दुनिया, इंडिया टुडे, आउटलुक जैसी पत्रिकाओं ने अपने इंटरनेट संस्करण निकालने आरंभ किए, इससे निश्चित ही इन पत्र- पत्रिकाओं की पाठक संख्या बढ़ी है। ' द स्टेट आफ द साइबरनेशन' पुस्तक के लेखक नील वैरट के अनुसार, इंटरनेट के संदर्भ में ' पाठ' को तीन भागों मे बाँटा जा सकता है। तात्कालिक महत्व के समाचार- परक लेख, जैसे दैनिक समाचार पत्र। पृष्ठभूमीय समाचार- परक लेख बैकग्राउंडर , जिनकी उपयोगिता अपेक्षाकृत कम समयबद्ध होती है जैसे साप्ताहिक और मासिक पत्रिकाएँ। स्थायी महत्व का कथा और अ- कथा साहित्य, यानी किताबें। इंटरनेट पर पूरी किताब उपलब्ध करवाना बाइट का खेल है। बाइट : कंप्यूटर में डेटा सुरक्षित रखने की आधारभूत इकाई, जिसमें एक बाइट आठ बिट के बराबर होती है , अधिकांश समाचार- परक लेखों की शब्द संख्या एक हज़ार शब्दों से कम होती है, पत्रिकाओं में छपने वाले लेखों की पाँच हज़ार शब्दों से कम, पूरे समाचार- पत्र या किसी पत्रिका को कंप्यूटर पर डाउनलोड करने में औसतन चालीस से पचास हज़ार शब्द लग सकते हैं। पुस्तकें इंटरनेट पर उपलब्ध करवाने में औसतन अस्सी हज़ार शब्द लगेंगे, यद्यपि यह संख्या तुलनात्मक रूप से अधिक प्रतीत होती है, लेकिन पूर्णत: व्यवहार्य है। कंप्यूटर की भाषा में कहें तो बिना चित्रों की अस्सी हज़ार शब्दों वाली किताब में मात्र ०. नहीं, तो फिर दोहरी मानसिकता क्यों? Or they would be donating blood, even helping in some rescue mission, far from the family. फिल्म की इस जबरदस्त स्टारकास्ट में जैकी श्रॉफ का नाम भी जुड़ गया है. जहां तक मुझे पता है रोहित सर और करण जौहर पहले राम-लखन के रीमेक के लिए ही हाथ मिलाना चाहते थे. यह अवश्य है कि लैप टॉप सरीखे महँगे कंप्यूटर का उपयोग नदी किनारे बैठकर कोई साहित्यिक कृति पढ़ने के लिए नहीं किया जा सकता। यह कंप्यूटर की सीमा भी है। लेकिन तकनीक सुलभ और सस्ती हो, तो भविष्य में कुछ भी संभव है। इंटरनेट पर साहित्य उपलब्ध होने से कुछ विधा संबंधी परिवर्तन आना तय है। उदाहरण के लिए, जिस प्रकार पत्रकारिता के दबावों के चलते रिपोर्ताज, धारावाहिक लेखन सरीखी विधाएँ सामने आई, उसी तरह कुछ नवीन विधाएँ इंटरनेट पर जन्म ले सकती है। सचित्र लेखन, कार्टून जिसका एक रूप है, उसकी तर्ज़ पर एक्शन भरा लेखन सामने आ सकता है। फ़िल्म और साहित्य के बीच की कोई विधा विकसित हो सकती है। ऑन लाइन फ़रमाइशी लेखन की संभावना भी बनती है। इंटरनेट पर सहकारी यानी सामूहिक लेखन के प्रयास भी हो सकते हैं। अब प्रश्न उठता है कि क्या इंटरनेट पर गंभीर साहित्य की रचना संभव है या फिर यह सिर्फ़ पॉपुलर साहित्य तक ही सिमट जाएगा, इस प्रश्न का उत्तर भविष्य ही दे सकता है। इतना अवश्य कहा जा सकता है कि इंटरनेट स्वयं संप्रेषण माध्यम की अंतिम कड़ी नहीं हैं। वैज्ञानिक खोजें किसी एक बिंदु पर आकर नहीं रुकतीं, टेलीप्रिंटर के आने से संप्रेषण माध्यम में एक नया आयाम जुड़ा और बाद में यह रेडियो के विकास की कड़ी बना। हालाँकि अपने स्वतंत्र रूप में टेलीप्रिंटर आज भी बना हुआ है। इतिहास बताता है कि मशीन पर किताब छपने से क्लासिक की परिभाषा और किताब का स्वरूप, दोनों ही बदले हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध होने वाले साहित्य को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। कुल मिलाकर इंटरनेट- साहित्य किताब की परिभाषा में कुछ नया ही जोड़ता है। बहुत कठिन है डगर पनघट की जब तक इंटरनेट सेवा मुफ़्त ही न हो जाए, हिंदी पट्टी तक इसका पर्याप्त विस्तार हो सकेगा, इसमें शक है। हिंदी को तकनीक सचेत बनाने में बहुत सारी समस्याएँ हैं। इन समस्याओं का हल निकाले बिना हिंदी को इंटरनेट पर लाने के अब तक के तमाम प्रयासों समेत भविष्य के भी समाप्त प्रयास प्रभावकारी नहीं हो सकेंगे। हिंदी में फोंट को ज़बरदस्त समस्या है। हिंदी के सैंकड़ों फोंट उपलब्ध हैं। और यही समस्या की असली जड़ है। अंग्रेज़ी के ' टाइम्स न्यू रोमन' की तरह हिंदी में कोई ' वैश्विक फोंट' नहीं है कि सभी हिंदी भाषी एक ही फोंट पर काम कर सकें। हर पत्रिका, हर अख़बार और हर प्रकाशक अपना एक नया ही फोंट चलाता है। इस तरह से हिंदी में फोंट को लेकर अराजकता की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण हिंदी में कोई एक जैसा की- बोर्ड कुंजीपटल नहीं हैं। हालाँकि बाज़ार में की- बोर्ड पर चिपकाने वाले स्टिकर मिलते हैं। लेकिन जिन लोगों को व्यावसायिक मांगों के चलते एक से अधिक फोंट पर काम करना पड़ता है उनके लिए ये स्टिकर किसी काम के नहीं होते, यह हिंदी की व्यावसायिक दुर्बलता है। इस मायने में यह हिंदी वालों की विलक्षण मेधा ही है कि वे अंग्रेजी के की- बोर्ड पर हिंदी की टाइपिंग कर लेते हैं। इससे सिद्ध होता है कि हिंदी वाले तमाम मुश्किलों के बावजूद तकनीक सचेत बने हैं। इंटरनेट उपयोगिता हिंदी- प्रेमी होने के कारण हिंदी की वेबसाइटों पर जाते तो हैं। लेकिन हिंदी में ' सबके लिए फोंट' न होने कारण टिकते नहीं। वेबदुनिया सरीखी प्रसिद्ध वेबसाइट के ' चैट सिस्टम' के असफल होने का यही कारण है। अपना समय, ऊर्जा और पैसा खर्च करके इंटरनेट सर्फिंग करने वाले उपयोगकर्ताओं से यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वे हिंदी के दुनिया भर के फोंट सीखते फिरेंगे। इन फोंटों से परिचित न होने की स्थिति में इंटरनेट उपयोगकर्ता को लगता है कि वह अपना समय और पैसा बर्बाद कर रहा है। इसी कारण हिंदी में ई- मेल भेजने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति या तो इंटरनेट पर जाता ही नहीं या फिर अंतत: अंग्रेज़ी में ही ई- मेल करता है। दरअसल की- बोर्ड की मैपींग एक ऐसी मानक तालिका निर्धारित करना, जिसमें प्रत्येक अक्षर, अंक और चिह्न के लिए तयशुदा मानक ' को' हों के मूल में ही फोंट की समस्या विद्यमान है। अंग्रेज़ी में भले ही फोंट अलग- अलग टाइम्स न्यू रोमन, एरियल हैं, लेकिन उन सबका की- बोर्ड एक ही है। असल में हिंदी का की- बोर्ड बनाते समय कोई मानक निर्धारित नहीं किया गया। अंग्रेज़ी में आई.

Next

Varun Dhawan की फिल्म Street Dancer की Final हुई Star Cast

ram lakhan की फिल्म

जॉन अब्राहम मन्या सुर्वे के किरदार में हैं. उनका कहना है कि आज के दौर के एक्टर्स दिखावे के लिए सोशल मीडिया पर एक दूसरे की फिल्मों को प्रमोट करते हैं लेकिन असल में ये स्टार्स बहुत इनसिक्योर होते हैं. और भी हैं से जुड़ी ढेरों ख़बरें. रणवीर सिंह फाइल फोटो मुंबई: अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ़ की 1989 की सुपरहिट फ़िल्म 'राम लखन' कई लोगों की पसंदीदा फिल्मों में से एक है। अब निर्माता रोहित शेट्टी इस फिल्म का रीमेक बनाने जा रहे हैं। जब से इस फ़िल्म की घोषणा हुई है, तभी से इसकी कास्टिंग को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। अब ख़बर आ रही है कि फ़िल्म की कास्टिंग पूरी हो चुकी है और राम-लखन की भूमिका में शाहिद कपूर व रणवीर सिंह नज़र आ सकते हैं। 'राम-लखन' के रीमेक के लिए रणवीर सिंह का नाम कई महीनों से मीडिया में आ रहा था, मगर उनके भाई की भूमिका के लिए रोहित शेट्टी के दिमाग में कई नामों और विचार चल रहे थे। लखन की भूमिका के लिए भी रणवीर सिंह के साथ वरुण धवन और अर्जुन कपूर दौड़ में थे। राम के रोल के लिए रणबीर कपूर, हृतिक रोशन और सिद्धार्थ मल्होत्रा का नाम सामने आ रहा था। रोहित शेट्टी की खोज अब पूरी हो गई है और रणवीर सिंह व शाहिद कपूर का नाम तय माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक शाहिद इस रीमेक में राम की भूमिका निभाएंगे, जो जैकी श्रॉफ़ ने निभाई थी। अनिल कपूर द्वारा निभाई गई लखन की भूमिका की जिम्मेदारी रणवीर सिंह को दी गई है। सूत्र बताते हैं कि इस साल के अंत में फ़िल्म की शूटिंग शुरू हो जाएगी। माधुरी दीक्षित और डिम्पल कपाड़िया द्वारा निभाई गई भूमिकाओं के लिए रोहित शेट्टी 2 नई लड़कियों को कास्ट करेंगे।. Although all the other elements have been gauged up, there is no life without the heart. ये लोग बस एक दूसरे की फिल्मों को प्रमोट करना चाहते हैं.

Next

नहीं बनेगा फिल्म राम लखन का रीमेक: रोहित शेट्टी

ram lakhan की फिल्म

On the other hand, we have followers of , who undertake every activity as a celebration of their special occasions. हाल ही में सलमान खान के साथ अनिल कपूर 'रेस 3' रिलीज हुई थी, और फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिली थी. In such a situation, only the followers of are the ones who not only live for others but also lend a helping hand to the Society Just a call and in few hours they are there as angels for the others. But we are doing every task, with our focus on the mobile, or a phone call, or every weekend planning. अनिल कपूर की बेटी का वजन ज्यादा है और वो अपने पिता फन्ने खां की तरह जिंदगी नहीं गुजारना चाहती है. चैनल दर्शक से पैसा नहीं माँग सकते, ऐसा न करने से फ्लाप तक हो सकता है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि इस दिशा में उस कंपनी को प्रयास करने होंगे जो हिंदी का सर्च इंजन उपलब्ध कराएगी, यह लचीली, कार्यक्षम और आक्रमक विपणन नीति से ही संभव हो सकता है। टी.

Next